Electoral Bond Kya Hota hai: चंदा देने का गुमनाम माध्यम पर क्यों लगा दी गई रोक

इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond) एक वित्तीय उपाय है जो कि भारत सरकार ने 2017 में शुरू किया था। यह एक प्रकार का शपथ पत्र है जिसके माध्यम से लोग राजनीतिक दलों को चंदा दे सकते हैं, लेकिन इसमें दानकर्ता का नाम नहीं होता है। इसका उद्देश्य यह है कि लोग अपनी पसंदीदा पार्टी को गुमनाम रूप से दान दे सकें।

Electoral Bond

Electoral Bond

इलेक्टोरल बॉन्ड का कामकाज

इस योजना के तहत, इलेक्टोरल बॉन्ड सिर्फ 15 दिनों के लिए वैध रहता है और इसे SBI (State Bank of India) के माध्यम से खरीदा जा सकता है। केवल उन राजनीतिक दलों को ही इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से चंदा मिल सकता है जिन्होंने पिछले आम चुनाव में कम से कम 1% वोट प्राप्त किया हो।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस योजना पर रोक लगा दी है और उसने कहा है कि इस योजना में अनुच्छेद 19(1)(A) का उल्लंघन है। इसके बावजूद, इलेक्टोरल बॉन्ड का उपयोग करने की प्रक्रिया काफी सरल है। डोनर को इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने के बाद किसी भी राजनीतिक पार्टी को डोनेट कर सकता है। इसके बाद, रिसीवर इसे कैश में कन्वर्ट करवा सकता है।

Electoral Bonds List

किस पार्टी को कितना चंदा मिला है, इसके बारे में आपको निचे एक टेबल के द्वारा बताया गया है।

इलेक्टोरल बॉन्ड के प्रायोजन

इस तरह, इलेक्टोरल बॉन्ड एक माध्यम है जिसके माध्यम से राजनीतिक दलों को चंदा मिलता है और लोग अपनी पसंदीदा पार्टी का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि, इसके इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण इसकी वैधता पर सवाल उठा है और सरकार ने इसे लेकर नई नीतियां बनाने की जरूरत महसूस की है।

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